वर्षा का गीत लेखक: विजय शर्मा ऐरी, अजनाला, अमृतसरआसमान पर काले बादलों ने धीरे-धीरे अपना साम्राज्य फैला लिया था. हवा में भीगी मिट्टी की सुगंध घुल चुकी थी. खेतों में खड़े पेड़ मानो बरसात का स्वागत करने के लिए झूम रहे थे. दूर कहीं कोयल की मधुर आवाज़ सुनाई दे रही थी. पहली बारिश की बूंदें जैसे धरती पर कोई मधुर गीत लिख रही थीं.गाँव के किनारे बने छोटे-से घर की खिड़की पर बैठी बारह वर्षीय नंदिनी बारिश को बड़े ध्यान से देख रही थी. उसके हाथ में एक पुरानी कॉपी थी, जिसमें वह अक्सर अपने मन की बातें लिखा करती