रहस्यमयी नक्शाffhहिमालय की ऊँची चोटियों पर सूरज की पहली किरणें बर्फ को सुनहरा बना रही थीं। ठंडी हवा के तेज़ झोंके चेहरे को चीरते हुए गुजर रहे थे।Nhgghhfghआर्यन ने अपने बैग की पट्टी कसते हुए कहा, "बस दो किलोमीटर और। उसके बाद कैंप लगाएँगे।"कबीर हँस पड़ा। "अगर तब तक तुम हमें किसी और पहाड़ पर न चढ़ा दो।"मीरा ने दूरबीन से सामने की चट्टानों को देखा। अचानक उसकी नज़र एक अजीब दरार पर पड़ी।"रुको... वहाँ कुछ है।"चारों उस ओर बढ़े। दरार के पीछे पत्थरों से बंद एक छोटी-सी गुफा