एपिसोड 2 – पहली मुलाकात, पहला झगड़ाअगली सुबह...आर्यवीर पूरी रात सो नहीं पाया था।दादी ने साफ़ कह दिया था—"अगले रविवार तक अगर तू अपनी पसंद की लड़की नहीं लाया, तो मैं जिस लड़की को पसंद करूँगी, उसी से तेरी शादी तय कर दूँगी।"आर्यवीर के हाथ से चाय का कप लगभग छूट गया।"दादी... एक हफ़्ते में लड़की कहाँ से लाऊँ?"दादी मुस्कुराईं।"ये मैं नहीं जानती।"इतना कहकर वे आराम से अख़बार पढ़ने लगीं।आर्यवीर ने मन ही मन सोचा—"अब सच में कुछ करना पड़ेगा।"ऑफिस पहुँचते ही कबीर उसकी टेबल पर आ बैठा।"तो? क्या फैसला किया?"आर्यवीर ने धीरे से कहा,"शायद... मुझे तेरी बात माननी पड़ेगी।"कबीर