वो लड़की जो कभी - Chapter 8-9

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अध्याय 8 — नानी की डायरीउस दिन बारिश थम चुकी थी, लेकिन हवा में अब भी भीगी मिट्टी की खुशबू घुली हुई थी।रुहिका घर के पुराने कमरे की सफ़ाई कर रही थी। लकड़ी की पुरानी अलमारी के नीचे एक लोहे का छोटा-सा संदूक रखा था। उस पर धूल की मोटी परत जमी हुई थी।"माँ, इसमें क्या है?" उसने आवाज़ दी।माँ कुछ पल चुप रहीं। फिर धीरे-धीरे कमरे में आईं। संदूक को देखकर उनकी आँखें भर आईं।उन्होंने काँपते हाथों से उस पर हाथ फेरा और बोलीं—"इसमें तुम्हारी नानी की यादें हैं… और एक ऐसा सपना, जो कभी पूरा नहीं हो सका।"रुहिका