वो लड़की जो कभी - Chapter 2-3

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वो लड़की जो कभी नहीं हारीअध्याय 2 — एक अधूरा सपनारुहिका की उम्र अभी बीस वर्ष भी नहीं हुई थी, लेकिन उसकी आँखों में समय से पहले आई हुई गंभीरता साफ़ दिखाई देती थी। वह जानती थी कि कुछ सपने पूरे होने से पहले ही परीक्षा लेते हैं।उस सुबह उसने अपनी पुरानी किताबें साफ़ कीं। हर किताब के पन्नों में उसे अपने बीते दिनों की खुशबू महसूस हुई। एक पन्ने पर उसकी अपनी लिखावट थी—"मैं अपनी पहचान किसी और के नाम से नहीं, अपने कर्म से बनाऊँगी।"वह मुस्कुरा दी।रसोई से माँ की आवाज़ आई, "रुहिका, चाय ठंडी हो जाएगी।"रुहिका दौड़कर