कल्याणी के सिर पर बंदूक ताने हुए उस आदमी ने अपने साथी की ओर देखा और ठंडी आवाज़ में कहा—"गाड़ी मोड़ो... इन्हें गोदाम ले चलो।"श्री मलोत्रा कुछ समझ पाते, उससे पहले ही सब कुछ हो चुका था।कार ने अचानक अपना रास्ता बदल लिया।अब वह शहर की ओर नहीं, बल्कि एक सुनसान इलाके की तरफ़ दौड़ रही थी।खिड़कियों के बाहर घना जंगल था।दूर-दूर तक कोई इंसान, कोई घर, कोई वाहन दिखाई नहीं दे रहा था।कुछ देर बाद कार जंगल के बीच एक ऐसे स्थान पर पहुँची, जहाँ ऊपर से देखने पर केवल घने पेड़ों का झुंड दिखाई देता था।लेकिन उन पेड़ों