चलो दूर कहीं.. 25सुबह के लगभग 7 बज रहे थे। दिल्ली के सूनी सड़कों पर इक्का-दुक्का वाहन आ जा रहे थे। बीते रात हुई बारिश से मौसम सुहाना था, इसलिए वैसे लोग जो दिल्ली के दमघोंटू आबोहवा से मार्निंग वॉक से परहेज़ करते थे आज अच्छी खासी तादाद में सड़कों के फूटपाथ पर टहल रहे थे।जब रोहन ने एक मोड़ से प्रतीक्षा के घर जाने वाली गली में टर्न लिया तो अनायास ही प्रतीक्षा की धड़कनें बढ़ गई.. ये वही गली था जहां उसका बचपन बीता था,उस गली का ऐसा कोई घर न था जिससे वो वाकिफ न थी, लेकिन