दोनों बिना एक शब्द बोले इमारत के भीतर प्रवेश कर गए।अधूरी बिल्डिंग के अंदर चारों तरफ सीमेंट की गंध फैली हुई थी। कहीं लोहे की सरियों के ढेर पड़े थे, तो कहीं ईंटों और मलबे का अंबार लगा हुआ था। टूटी हुई खिड़कियों से आती तेज़ हवा की आवाज़ पूरे माहौल को और भी डरावना बना रही थी।युग ने अपनी कलाई पर बंधी घड़ी की तरफ देखा।"हम पाँच मिनट पहले पहुँच गए हैं। अगर सामने वाला वक्त का पाबंद हुआ तो अभी तक आ जाना चाहिए था।"शिव ने कोई जवाब नहीं दिया। उसकी तेज़ नज़रें पूरे परिसर का निरीक्षण कर