बारिश आई... पर समस्या वही रहीसुहाना मौसम... पर सबके लिए नहीं आदमी भी क्या अजीब जीव होता है। पहले धूप, गर्मी से परेशान थे, ईश्वर बारिश कर दो, गर्मी से बुरा हाल हो रहा है। अब प्रभु ने बारिश कर दी तो सड़कों पर इतना पानी भर गया, नदियां बन गईं गली मोहल्लों में। औरतें, बच्चे तो अपने घरों में सुरक्षित हैं लेकिन बेचारा आदमी, कमाना भी जरूरी है, घर में नहीं बैठ सकता। मन तो उसका भी करता है, घर बैठकर मजा ले बारिश का। चाय-पकौड़े का स्वाद ले। लेकिन उसी चाय-पकौड़े के स्वाद के लिए काम पर जाना भी जरूरी