अनाथ - अध्याय 5

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सुबह की पहली किरणें अभी जंगल की ऊँची पहाड़ियों पर पड़नी शुरू ही हुई थीं। अर्जुन राठौर की काली एसयूवी विशाल लोहे के गेट के सामने आकर रुकी। गेट पर बड़े सुनहरे अक्षरों में लिखा था— "अग्निवीर आश्रम" गेट के दोनों ओर खड़े सुरक्षा कर्मियों ने अर्जुन को देखते ही सलामी दी। भारी-भरकम गेट धीरे-धीरे खुला और कार अंदर प्रवेश कर गई। मानव ने खिड़की से बाहर देखा। यह कोई साधारण आश्रम नहीं था। चारों ओर घने पेड़, साफ़-सुथरे रास्ते, अनुशासित वातावरण और दूर तक फैले प्रशिक्षण मैदान दिखाई दे रहे थे। कुछ युवा दौड़ लगा रहे थे, कुछ निशानेबाज़ी