मंदिर में तुम - 7

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रात का समय था…कोरिया में लाइट्स चमक रही थीं…और सुनामी अपने केबिन में अकेली बैठी थी…आज उसका मन बहुत बेचैन था…उसने तुरंत फोन उठाया…और…कृतिक को वीडियो कॉल कर दिया… कुछ सेकंड…फिर स्क्रीन पर वही चेहरा आया…कृतिक… ️ थोड़ा थका हुआ… पर वही सुकून देने वाली मुस्कान…।कृतिक (हल्की मुस्कान के साथ) बोला - अरे… इंजीनियर साहिबा…आज तो बड़े दिनों बाद वीडियो कॉल… सुनामी की आँखें चमक उठीं…वो बोली - आज आपको कुछ दिखाना है…!कृतिक बोला - अच्छा…? दिखाइए…सुनामी तुरंत खड़ी हो गई…वो फोन लेकर पूरे ऑफिस में घूमने लगी—ये मेरा केबिन…ये मीटिंग रूम…ये balcony… यहाँ से पूरा शहर दिखता है…उसकी आवाज़ में बचपन