ईश्वर की कृपा

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ईश्वर की कृपा मोहन नाम का एक युवा बहुत आलसी था। सारे दिन बिस्तर पर ही पड़ा रहता। एक दिन उसकी बूढ़ी माँ ने उसे बहुत फटकार लगाई और घर से निकाल दिया। मोहन ने सोचा अब कहाँ जाऊँ, क्या करूँ, कोई उपाय तो करना होगा जो बिना काम करे खाने को मिल जाए।वह राजा के महल के सामने जाकर ऐसी जगह बैठ गया कि महल से आते-जाते राजा की नजर उस पर जरूर पड़े। तीन दिन हो गए उसे महल के आगे बैठे हुए, राजा भी उसे रोज देखता पर कहता कुछ नहीं। चौथे दिन राजा ने अपना दरबारी भेजा