अमृत वाणी - संत वाणी - 41

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भगवान महावीर स्वामी की वाणी“अहिंसा परमो धर्मः।सव्वे जीवा वि इच्छंति, जीविउं न मरिज्जिउं।।”(अहिंसा ही सबसे बड़ा धर्म है। महावीर स्वामी कहते हैं – जैसे तुम्हें अपना जीवन प्यारा है, मरना कोई नहीं चाहता, वैसे ही इस संसार का हर जीव जीना चाहता है, मरना कोई नहीं चाहता। इसलिए किसी भी जीव को कष्ट मत दो।)गहरे अर्थ की व्याख्याइंसान सोचता है कि अहिंसा का मतलब होता है सिर्फ किसी को मारना नहीं है। पर महावीर की अहिंसा बहुत गहरी है। वो कहते हैं कि हिंसा 3 तरह की होती है – मन से, वचन से, और कर्म से। किसी के बारे में