“दादू इस संसार में, दोई रत्न अमोल।एक साईं एक संत है, जे कोई जानै तोल॥”गहरे अर्थ की व्याख्या संत दादू दयाल जी इस साखी में जीवन की सबसे मूल्यवान संपत्ति की पहचान करवा रहे हैं। वे कहते हैं कि इस पूरी सृष्टि में केवल दो ही रत्न ऐसे हैं जो वास्तव में अनमोल हैं, जिनका कोई मोल नहीं लगाया जा सकता। पहला रत्न स्वयं ‘साईं’(परमात्मा/ईश्वर) है, और दूसरा रत्न ‘संत’ (वह गुरु या श्रेष्ठ पुरुष जो सत्य का मार्ग दिखाता है)। जो व्यक्ति इन दोनों के आध्यात्मिक महत्व और मूल्य को समझ लेता है (जे कोई जानै तोल), उसका जीवन पूरी