“भीखा बात अगम की, कहन सुनन की नाहिं।जो जाने सो कहे नहीं, कहे सो जाने नाहिं॥”संत भीखा साहब कहते हैं कि वह परम सत्य (परमात्मा का अनुभव) अत्यंत अगम्य और गहरा है, वह केवल मुँह से कहने या कानों से सुनने की वस्तु नहीं है। जिसे वास्तव में उस दिव्य आनंद का अनुभव हो जाता है, वह मौन हो जाता है। इसके विपरीत, जो केवल ऊपरी दावों और अहंकार के जरिए बड़ी-बड़ी बातें करता है, वास्तव में उसने उस सत्य को जाना ही नहीं है।गहरे अर्थ की विस्तृत व्याख्याइस वाणी में भीखा साहब आध्यात्मिक अनुभव की ‘अनिर्वचनीयता’ (जिसे शब्दों में