अमृत वाणी - संत वाणी - 31

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संत बुल्ले शाह जी की यह वाणी किसी भी प्रकार के बाहरी दिखावे और किताबी ज्ञान के घमंड को छोड़कर दिल की सफाई और खुदा (परमात्मा) के प्रति सच्चे प्रेम का मार्ग दिखाती है।“पढ़ पढ़ इल्म हजार किताबें, कदी अपने आप नूं पढ़िया नईं।जा जा वड़दे मंदिर मसीती, कदी मन अपने विच वड़िया नईं।ऐवें लड़दा एं रोज शैतान दे नांल, कदी नफ्स अपने नांल लड़िया नईं।बुल्ले शाह असमानी उड्डियां फड़दा एं, जेड़ा घर बैठा ओहनूं फड़िया नईं।।”दोहे का हिंदी अर्थ : तुमने हजारों किताबें और ग्रंथ पढ़ लिए और बहुत सारा ज्ञान (इल्म) इकट्ठा कर लिया, लेकिन कभी अपने खुद