संत गुरु अर्जुन देव जी की यह वाणी किसी भी प्रकार के लालच और दिखावे को छोड़कर निष्काम भाव से कर्म करने का सच्चा मार्ग दिखाती है।“सेवा करत होइ निहकामी।तिस कउ होत परापति सुआमी।।”हिंदी अर्थ : जो मनुष्य बिना किसी स्वार्थ, लालच या फल की इच्छा के समाज और जीवों की सेवा करता है, केवल उसी पवित्र इंसान को साक्षात परमात्मा की प्राप्ति होती है और उसका जीवन सफल हो जाता है।अक्सर लोग इस कसौटी को सुनकर सोचते हैं कि क्या अपने परिवार के लिए कमाना या अपनी सुख-सुविधाओं के लिए इच्छा रखना गलत बात है? लेकिन गुरु अर्जुन देव