हम पूरी जिंदगी इस कोशिश में बिता देते हैं कि समाज में हमारा एक बड़ा नाम हो, लोग हमसे प्यार करें, और हमारे सगे-संबंधी हमेशा हमारे अनुकूल रहें। लेकिन इस दुनिया का एक बहुत कड़वा नियम है—यहाँ हर रिश्ता किसी न किसी शर्त या स्वार्थ पर टिका होता है। जब तक आप दूसरों की उम्मीदों पर खरे उतरते हैं, सब आपके साथ हैं; जिस दिन परिस्थितियाँ बदलती हैं, सब अपनी राह पकड़ लेते हैं। इस सांसारिक अकेलेपन के बीच जो आत्मा को कभी न छूटने वाला सच्चा सहारा दे, वही असली सत्य है। मीराबाई जी ने इसे बहुत ही निडरता