अमृत वाणी - संत वाणी - 12

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हम अक्सर अपनी असफलताओं के लिए अपनी किस्मत या अपनी मेहनत को दोष देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके आस-पास मौजूद लोग और विचार आपके जीवन की दिशा तय कर रहे हैं? संत तुलसीदास जी ने इस बात को प्रकृति के एक बेहद खूबसूरत उदाहरण से समझाया है :“कदली, सीप, भुजंग मुख, स्वाति एक गुन तीन।जैसी संगति बैठिए, तैसो ही फल दीन॥” — संत तुलसीदास(स्वाति नक्षत्र की बूंद तो एक ही होती है, लेकिन अलग-अलग संगति के कारण उसके तीन रूप हो जाते हैं। यदि वह केले के पेड़ पर गिरे तो कपूर, सीप में गिरे तो