“प्यार और विनम्रता ही जीवन के सच्चे आभूषण हैं, बाकी सब केवल बाहरी दिखावा है।”यह विचार आज के इस चकाचौंध और दिखावे के युग के लिए एक बहुत बड़ा जीवन-मंत्र है, जहाँ लोग बाहरी सुंदरता को ही सब कुछ मान बैठे हैं।गहरे अर्थ की व्याख्यासंत तिरुवल्लुवर जी कहते हैं कि मनुष्य का असली मूल्य इस बात से तय नहीं होता कि उसने कितने महंगे कपड़े पहने हैं या उसके पास कितनी बड़ी गाड़ी है। मनुष्य का वास्तविक सौंदर्य उसके ‘चरित्र’ से झलकता है। जिसके भीतर हर जीव के प्रति ‘प्यार’ (Love) है और जिसके व्यवहार में ‘विनम्रता’ (Humility) है, ईश्वर