सुनसान सड़क पर एक काली एसयूवी स्थिर गति से आगे बढ़ रही थी। कार की रफ्तार लगभग चालीस किलोमीटर प्रति घंटा रही होगी। इंजन की धीमी घरघराहट और टायरों की सड़क पर रगड़ खाने की आवाज़ के अलावा चारों ओर ऐसा सन्नाटा पसरा था, मानो पूरी दुनिया ने कुछ देर के लिए सांस रोक रखी हो।शाम ढलने लगी थी।आसमान पर हल्का नारंगी रंग धीरे-धीरे बैंगनी होने लगा था। दूर क्षितिज के पास सूरज आधा डूब चुका था। सड़क के दोनों ओर फैले खेतों पर शाम की सुनहरी रोशनी पड़ रही थी, जो कुछ ही देर में अंधेरे में बदलने वाली