पुत्र सुखमनु खाना खाने बैठा - थाली की सब्जी में बाल उसे फिर दिखगया, बाल देखते ही मनु जोर से चिल्लाया- "खाना बनाना नहींआता, तो मत बनाया करो- मैं यह खाना नहीं खा सकता कभी मुझेढंग से खाना नहीं मिलता- इस घर का यही हाल है'- बड़बड़ाताहुआ मनु थाली छोड़कर खड़ा हो गया।मधु अन्दर से बाहर आते हुये बोली- "रूक बेटा मैं दूसरी सब्जीला देती हूँ।"मनु - नहीं, मुझे खाना नहीं खाना है।मधु बोली- बेटा मैं दूसरी सब्जी बना देती हूँ।मनु बोला- मैने कितनी बार कहा है, मैं तुम्हारा बेटा नहीं हूँ।मुझे बेटा मत कहा करो, चली आई बेटा कहने