संस्मरण :_ अपने अपने नामवर ----------------------------------------- "तुम्हारी कविताओं में एक नई बात है संदीप। जब इन्हें पढ़ता हूं तो लगता नहीं कि यह तुम्हारा प्रथम काव्य संग्रह है।" मेरे संग्रह " वह स्त्री लिख रही है" को पढ़ते हुए नामवर सिंह जी ने कहा। दिल्ली ,कालका जी में गोविंदपुरी मेट्रो स्टेशन के बाई तरफ शांत सी अलकनंदा कालोनी में शिवालिक अपार्टमेंट। वहीं मैं उनके रूबरू था। कॉलबैल के जवाब में वह धवल धोती कुर्ता में स्वयं दरवाजा खोलने आए थे।साक्षात छ फुट कद का गौरवर्ण व्यक्तित्व,चश्मे से झांकती गंभीर पर बहुत कुछ कहती आंखे, मैं ही हिंदी आलोचना के शिखर