महेन्द्र प्रताप चौहान के हाथ काँप रहे थे।बालकनी में खड़े-खड़े उसने एक बार फिर उस फोटो को देखा।राजू भाई...चेहरे पर लाल रंग का बड़ा सा बना हुआ था।उसने जल्दी से फोटो पलटी।पीछे वही एक लाइन..."अगला नंबर तुम्हारा है..."कुछ सेकंड तक उसकी साँसें तेज़ चलती रहीं।उसने चारों तरफ देखा।बालकनी खाली थी।नीचे फार्महाउस में तेज़ संगीत बज रहा था।लोग शराब पी रहे थे।हँस रहे थे।नाच रहे थे।लेकिन...महेन्द्र के लिए जैसे पूरी दुनिया अचानक खामोश हो गई थी।उसने तुरंत फोन निकाला।सिर्फ एक नंबर डायल किया।फोन दो बार बजा...तीसरी घंटी पर कॉल उठ गई।दूसरी तरफ से शांत आवाज़ आई—"बोलिए विधायक जी।"महेन्द्र की आवाज़