धर्मराज की सभाप्रथम अध्याय : यमलोक की आपातकालीन सभा (आगे)चित्रगुप्त की वाणी समाप्त होते ही समूची देवसभा मौन हो गई। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं काल भी अगले क्षण की प्रतीक्षा कर रहा हो।धर्मराज कुछ देर तक गहन चिंतन में डूबे रहे। फिर उन्होंने अपने राजदंड को धीरे से भूमि पर स्पर्श कराया। क्षणभर में पूरा सभामंडप दिव्य प्रकाश से आलोकित हो उठा।उन्होंने गंभीर स्वर में आदेश दिया—"चित्रगुप्त! जिस मनुष्य की चर्चा अभी हुई है, उसे तत्काल देवसभा में प्रस्तुत किया जाए। न्याय केवल कर्मों का लेखा देखकर नहीं, सत्य को सामने रखकर किया जाता है।"आदेश मिलते ही