कहानी बंटवारा "ममा ये कैसा खाना है?हमसे नहीं खाया जा रहा।" रीशु झुंझला कर कहा तो झेंपती हुई तृषा बैठक से उठ के भीतर आई और बेटे को चुप रहने का इशारा किया। रीशु समझ नही सका, उसने दुबारा कहा " हम पिछली बार इसी घर मे आये तो कितनी तरह की डिस बनती थी,इस बार सब बेस्वाद चीजें बन रही।आखिर क्यूँ?' तृषा ने धीमे स्वर में कहा ' तब गिजू चाचा की शादी में आये थे, अबकी बार उन चाचा की मम्मी की डैथ में आये हैं।' 'तो फर्क क्या हुआ?' 'फर्क यह है कि तब उत्सव का