(समय ) तीन बच्चो की माँ को पता चला.... तीन महीने बाद का चित्रण स्टेज पे.... ग्रेवाल अच्छी एक्ट कर लेता था... मानना पड़े गा। " पी कर आये है, पी कर जायेगे,कुछ सकून दे जाओ, हम आज भी फरयादी है। " ये शायरी बलजीत सिंह के आगे रखी थी...". वाह के सिवा कया कहु। " दोनों गंभीर थे। पता नहीं उसके मुँह से निकला..." आज खाना बलजीत कौर के हाथो का खाओ गे.. सच मे। " तभी रजिदर सिंह आ गया। " हरफ़न मोला चल आज तेरे गांव चलते है.... तूने यार कभी बताया ही नहीं, तुम्हरी बहन और बाबू जी