Devil की दास्तान - 30

  • 429
  • 117

सुबह का समय। बारिश थमी है। हवेली के बाहर धूप की हल्की किरणें पड़ रही हैं। करण बिस्तर पर पड़ा है — थका हुआ, बिखरा हुआ। पास में सिमरन उसकी देखभाल कर रही है।)"रात की वो आग अब राख बन चुकी थी...पर उस राख में कुछ चिंगारियाँ अब भी जल रही थीं —यादों की... और अधूरे प्यार की..."(सिमरन धीरे से करण के माथे पर पानी का कपड़ा रखती है। करण करवट बदलता है।)करण (धीरे से बड़बड़ाते हुए) बोला - “खून... लाल... गाड़ी... वो लड़की... वो चिल्ला रही थी…”(सिमरन चौंकती है।)सिमरन (धीरे से) बोली - “करण जी… क्या याद आ रहा है आपको?”(करण