Devil की दास्तान - 29

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करण अपनी हवेली के ऊपरी कमरे में खड़ा है। रात गहरी और चांदनी बहुत हल्की है। हवेली की खिड़कियों से हल्की-हल्की हवा आती है। कमरे में केवल उसकी साँसों की आवाज़ सुनाई दे रही है।)"जब इंसान और शैतान का संगम एक ही हृदय में हो…तो हर धड़कन एक जंग बन जाती है।करण के भीतर भी वही हो रहा था — प्यार और प्यास के बीच।"( उसकी आँखें लाल हैं, दाँत लंबे और नुकीले, हाथ हिल रहे हैं। वह अपने आप से लड़ रहा है।)करण (भीतर से, खुद से लड़ते हुए, फुसफुसाते स्वर में) बोला - "नहीं... मैं उसे नुकसान नहीं पहुँचा