अनाथ - अध्याय 1

जिस दिन इंसान नहीं, किस्मत रोई थी... रात के ठीक बारह बजे... आसमान जैसे अपना सारा दर्द धरती पर उँडेल रहा था। बिजली की हर कड़क के साथ पूरा शहर काँप उठता, और उसी बारिश में शहर के बाहर स्थित एक पुराने शिव मंदिर की सीढ़ियों पर एक नन्हा-सा बच्चा लगातार रो रहा था। उसकी आवाज़ बहुत छोटी थी... लेकिन शायद भगवान तक पहुँच रही थी। मंदिर के सामने से दर्जनों लोग गुज़रे। किसी ने एक नज़र देखा... फिर अपनी छतरी सिर पर ठीक की और आगे बढ़ गया। किसी पाप की औलाद होगी... एक औरत ने घृणा से कहा।