राक्षसों ने एक-दूसरे की तरफ देखा...और फिर एक साथ झपट पड़े।बोला - देवकन्या को पकड़ो!आज बचने मत देना!पूरा जंगल उनकी चीखों से गूँज उठा। सिद्धिदात्री पीछे हट गई। उसने खंजर निकाल लिया। लेकिन राक्षसों की संख्या बहुत ज्यादा थी। तभी...रितांश के भीतर फिर वही जलन उठी। उसकी आँखें लाल हो गईं। पीठ में तेज़ दर्द हुआ। और अगले ही पल...उसके विशाल काले पंख बाहर निकल आए।फड़ाआक!पंखों के फैलते ही तेज़ हवा का झोंका उठा। पेड़ों की शाखाएँ टूटने लगीं। सिद्धिदात्री आश्चर्य से उसे देख रही थी।वो बोली - रि... रितांश...लेकिन रितांश के पास सोचने का समय नहीं था। उसने तुरंत सिद्धिदात्री को