जिंदगी की दूसरे किनारा - 23

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ज़िन्दगी की दुसरा किनारा पाठ 23और वही यह सुनते ही अचानक डॉक्टर देव की आंखें चोरी हो जाती है और सांस रुक्स जाता हैजैसे कि वह सदमे में हो उसका चेहरा और भी ज्यादा गंभीर हो जाता हैवह कोई जवाब नहीं देता बस उसे देखता रहता है जैसे कि कुछ सेकेंड तक होस ही ना हो और तभी अचानक अभिराज और गुस्से में आकर और सख्त और ऊंची आवाज में कहता है जवाब दो क्या वह मेघना थी और तभी अचानक डॉक्टर देव अभिराज की बातें सुनते ही डर के मारे घबराते हुएअपने अटकते हुए सांस एक साथ ही लेते और छोड़ते हुए हरबाराहट में हकलाते हुए हामी भर देता है हां और तभी अभिराज अचानक गुस्से