समय के पंख और पिता की सीख

बचपन की स्मृतियाँ अक्सर जीवन के किसी मोड़ पर अचानक लौट आती हैं और फिर मन को उन गलियों में ले जाती हैं जहाँ से हमारे व्यक्तित्व की यात्रा शुरू हुई थी।आज जब मैं अपने जीवन के अनेक उतार-चढ़ावों को पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो मुझे अपने बचपन की एक छोटी-सी घटना बहुत गहराई से याद आती है।मैं दूसरी कक्षा में पढ़ता था। हमारी पाठ्यपुस्तक में "समय" नाम की एक कहानी थी। कहानी तो अपनी जगह थी, लेकिन उससे भी अधिक मेरा ध्यान उसके साथ बने एक चित्र ने खींचा था। उस चित्र में एक विचित्र आकृति दिखाई गई थी—सिर