पवित्र प्रेम या अभिशाप Season 2 - 4

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पूरे दिन सिद्धिदात्री का मन उलझा रहा।उसने सोचा -वह नहीं जानता कि वह क्या है। लेकिन जब जान जाएगा...तब क्या होगा?उसने अपनी माँ की बात याद की जो उसे बचपन से सुनाई जाती थी—उसकी मां बोलतीं थीं -राक्षस पहले भोले लगते हैं। फिर अपना रूप दिखाते हैं।तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।उसने फैसला कर लिया। आज रात वो उसे खत्म कर देगी। पूर्णिमारात के दो बज रहे थे। चाँद पूरा था। आसमान साफ था। घर में सब सो रहे थे। सिद्धिदात्री उठी। उसने खंजर उठाया। धार परखी। उसके हाथ नहीं काँपे। वर्षों की साधना थी। वर्षों का प्रशिक्षण।वह