मैं पेड़ बनना चाहती हूँ

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शहर की सबसे ऊँची इमारत की 12वीं मंज़िल पर मेरा कमरा था। खिड़की से सिर्फ़ कंक्रीट, शोर और भागती हुई गाड़ियाँ दिखती थीं।  नाम है मीरा। उम्र 26। नौकरी, डेडलाइन, बॉस की डाँट  सब था। बस साँस नहीं थी।एक दिन ऑफिस से लौटते वक्त़ मैं फुटपाथ पर गिर पड़ी। चक्कर। डॉक्टर बोला, “तुम्हें कुछ नहीं हुआ है। बस तुम इंसान होना भूल गई हो।”उसी रात छत पर गई। बगल वाले प्लॉट में एक अकेला नीम का पेड़ खड़ा था। आँधी आई, पानी बरसा, धूप चमकी वो हिला नहीं।  मैंने उससे पूछा, “तुम्हें डर नहीं लगता?”  हवा चली। लगा जैसे पेड़