स्नोसिटी रात का वक्त : नशे में धुत होकर खुश होती धरुविका नहीं जानती थी ! कि वो क्या करणे जा रही है ! और उससे कितना बड़ा कोहराम मचेगा ! धरुविका लड़खडाते कदमो के साथ खुशी में झुमते हुवे आगे बडी ! उसने झुक कर ताबुक के अंदर देखा ! और अगले ही पल उसके आखे बड़ी हो गई ! और धड़कने बड गई ! तेज होती सासों के साथ पीछे लड़खड़ा गई ! उसका सारा नशा एक झटके में उतर गया ! अंदर सचमे एक इंसान लेटा हुआ था ! जिसकी आँखे बंद थी ! चाँद की रोशनी उस लड़के पर