अधुरा प्यार - 8

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शक्कर का जहर और रूह का कत्लेआमभाग एक: एक मखमली साजिश (The False Calm)मुंबई की वह दोपहर इतनी गर्म थी कि हवा के थपेडे चेहरे पर किसी पुराने गुनाह की तरह लग रहे थे. इकबाल के हाथ में वह खूनी' I' चाबी ठंडी थी, जैसे किसी मुर्दे की उंगली. आज वह हाथ- गाडी वाला इकबाल नहीं, बल्कि अपनी सबसे साफ कमीज में खडा वह पत्रकार था जिसका' AK Service' कभी एक साम्राज्य था.जब दरवाजा खुला, तो इकबाल की' चेतना' चीख पडी. जुबेदा के पिता, जिनके लहजे में कल तक नफरत की आग थी, आज उनकी आँखों में चाशनी जैसी मिठास