समुद्री लुटेरा

समुद्री लुटेरालेखक: विजय शर्मा ऐरीसमुद्र की लहरों में एक अजीब-सी बेचैनी थी। रात का समय था। आसमान में बादल छाए हुए थे और चाँद कभी दिखाई देता तो कभी बादलों में छिप जाता। दूर-दूर तक सिर्फ पानी ही पानी था। उस अथाह समुद्र में एक पुराना जहाज़ लहरों से लड़ता हुआ आगे बढ़ रहा था।उस जहाज़ का मालिक था—समुद्री लुटेरा रूद्र।रूद्र का नाम सुनते ही व्यापारियों के चेहरे पीले पड़ जाते थे। वह कभी किसी देश का नहीं रहा था। उसका घर समुद्र था और उसकी पहचान डर।लेकिन आज रूद्र के चेहरे पर वैसी कठोरता नहीं थी। उसकी आँखों में