जिंदगी की दूसरे किनारा - 20

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जिंदगी की दूसरा किनारा पार्ट 20 और वही मेघना की दुनिया में कुछ देर के बाद मेघना को होस में आ चुकी हैवह थरथराहट से भारी  लहूलुहान हाथों के साथ घुटने के बल बैठते हुए और घुटनों के बल खिसक खिसक चलते हुए और सर झुकाते हुएऔर जोरो जोरो से शिशक से शिसक कर लंबी और गहरी  सांस लेते हुए वहां बिखरे हुए किताबें को जल्दबाजी में एक-एक करकेलहूलुहान परी दोनों हाथों से उठा रही हैवहां बिखरे हुए शीशे हाथों में चुब गए हैं ऐसे ही पागलों की तरह वह किताबें उठाते हुए उसके हाथ लहू लहान है और वह जगह भी और जगह जगह बिखरे हुए शीशे के टुकड़ेऔर