नकाब और तन्हाई - 4

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किस्त 4: बारिश, कॉफ़ी और अधूरी पेंटिंगशिकागो का मौसम भी जैक की ज़िंदगी की तरह अनिश्चित है। अभी दोपहर की हल्की धूप खिली थी और देखते ही देखते आसमान स्याह बादलों से घिर गया। लाइब्रेरी की ऊँची खिड़कियों पर बारिश की बूंदें ज़ोर-ज़ोर से थपकियाँ देने लगीं।जैक अपना काम खत्म कर के बाहर निकलने ही वाला था कि उसने देखा—एली लाइब्रेरी के मुख्य द्वार पर खड़ी है। वह बाहर गिरती मूसलाधार बारिश को देख रही थी और उसके पास छाता नहीं था। उसके हाथ में वही स्केचबुक थी, जिसे उसने अपने ओवरकोट के अंदर बड़ी हिफाज़त से छुपा रखा था