बेजान इंसान जिसमे जान तो है, पर असल मे बेजान ही है..बस दर्द अब होता नहीं.इंतज़ार का कोई मतलब नहीं. खामोशियाँ पसंद है,पर वो मिलती नहीं.तन्हाई पसंद नहीं, पर चारो तरफ फैली हुई.बस --_----------------------------/----------जूली मन मोजी, बेफिक्र इस जालिम दुनिया सेपिता के पैसे पर अयाशी, क्लब और नशा क्यो क्योंकि जूली के माता पिता लडते और झगडते रहते जब से जूली ने होश संभाल तब से बस घर मे लडाई का माहोल माँ बाप कि आपस मे नहीं बनती,तो माँ, किटी पार्टी और शॉपिंग मे व्यस्त रहती!बाप दौलत कमाने मे व्यस्त!जूली पल रही थी बस दौलत से,प्यार ना, माँ बाप का साथ,जूली