अपने ही हाथों लिखी बर्बादी

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सड़क के किनारे लगा इकलौता पीला बल्ब बारिश की तेज़ बौछारों के बीच किसी बीमार इंसान की तरह टिमटिमा रहा था। आसमान में घुप्प अँधेरा था, ऐसा अँधेरा जो आँखों को नहीं, सीधा रूह को अंधा कर दे। डामर की उस खुरदरी और टूटी सड़क पर पानी के गहरे गड्ढे बन चुके थे। उन्हीं गड्ढों के पास, अपनी जंग खाई, बंद पड़ी पुरानी बाइक के सहारे आर्यन बैठा था। बारिश का बर्फ जैसा ठंडा पानी उसके बालों से टपककर उसकी गर्दन के पीछे जा रहा था, लेकिन उसे उस ठंड का कोई अहसास नहीं था। आज उसके अंदर एक ऐसा