सूर्यकुल का सूर्यास्त - 2

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अध्याय 2: नियति का नया खेलमहान अपराजित तलवार योद्धा, जिसकी तलवार की चमक से कभी नक्षत्र कांपते थे, उसकी मृत्यु के 5 लंबी शताब्दियों के बाद कालचक्र ने एक नया मोड़ लिया। एक सुदूर, अनजाने ग्रह की मिट्टी में उसका पुनर्जन्म हुआ। समय अपनी गति से बहता रहा और वह योद्धा 21 वर्षों तक एक साधारण युवक की चेतना में सोया रहा।विराज एक रात अपने कक्ष की शांति में गहरी निद्रा में लीन था, तभी अचानक ब्रह्मांडीय ऊर्जा का एक तीव्र झोंका उसके मस्तिष्क से टकराया। बंद आंखों के पीछे स्मृतियों का एक प्रलयंकारी सैलाब उमड़ पड़ा। उसके पूर्व जन्म