बाथरूम का दरवाज़ा पूरा खुल चुका था। कमरे में भाप धीरे-धीरे फैल रही थी…और फिर एक आदमी बाहर आया। उसके बाल गीले थे, कंधे पर टॉवेल पड़ा था। चेहरा साफ नहीं दिख रहा था, लेकिन आवाज़ बिल्कुल शांत थी। वो कुछ पल कमरे में इधर-उधर देखता रहा। फिर उसकी नज़र सीधे बेड की तरफ गई।और उसने बहुत ठंडे लहजे में कहा—मुझे पता है तुम बेड के नीचे छुपी हो।━━━━━━━━━━━━━━━शुभिका का दिल जैसे रुक गया। उसकी साँस अटक गई।वो खुद से बोली - नहीं… नहीं… ये मुझे नहीं देख सकता…वो अपने मुँह पर हाथ रखकर और अंदर सिमट गई।━━━━━━━━━━━━━━━कमरे में सन्नाटा था।