एपिसोड – “सच के आँसू”मंदिर के कोने में बैठी चित्रअब भी रो रही थी…उसकी सिसकियाँभोलेनाथ के सामने टूट रही थीं—“मैं गलत नहीं हूँ…”तभी…धीरे-धीरे कदमों की आहट आई।चित्र ने आँसू पोंछे भी नहीं थे कि—दिव्यम उसके सामने खड़ा था। अचानक सामनाचित्र एकदम चौंक गई—“आप…?”दिव्यम की आँखें झुकी हुई थीं।उसकी आवाज़ भारी थी—“मुझसे गलती हो गई, चित्र…”चित्र ने कुछ नहीं कहा…बस उसे देखती रही। टूटा हुआ भरोसादिव्यम आगे बढ़ा—“मैं… मैं तुम्हें समझ नहीं पाया…”“मैंने… बिना सच जाने तुम्हें गलत समझ लिया…”बस इतना सुनना था कि—चित्र का दिल फिर से भर आया। फूट-फूट कर रोनाचित्र अचानकजोर-जोर से रोने लगी—“नहीं… ऐसा मत कहिए…”“आप