क्षितिज के उस पार तक फैला आकाश आज नीले रंग का नहीं, बल्कि ताजे बहते रक्त के समान गहरा लाल था। हवा भारी और बोझिल हो चुकी थी, जिसमें लोहे जैसी तीखी खून की महक और जलते हुए मांस की दुर्गंध घुली हुई थी। यह महक इतनी तीव्र थी कि जीवित बचे लोगों की साँसें घुट रही थीं। आकाश में हज़ारों गिद्ध और मांसाहारी जंगली पक्षी मंडरा रहे थे, जो नीचे बिछी लाशों के ढेर को अपनी भूखी निगाहों से तौल रहे थे। उनके डैने फड़फड़ाने की आवाज़ें और बीच-बीच में सुनाई देने वाली कर्कश चीखें इस वीराने को और