और जैसे ही वो परछाई सामने आई…शुभिका का दिल बैठ गया।वो बोली - व… विक्रांत…वो सच में वही था। बारिश से भीगे बाल आँखों में वही पागलपन…और चेहरे पर ठंडी मुस्कान।वो बोला - कहाँ भाग रही हो शुभिका?उसकी आवाज़ इतनी शांत थी कि डर और बढ़ गया।━━━━━━━━━━━━━━━शुभिका ने एक सेकंड भी नहीं रुका। वो मुड़ी और पूरी ताकत से फिर भाग पड़ी।वो बोली - नहीं… मैं अब नहीं रुकूँगी…उसके पीछे विक्रांत की आवाज़ गूँजी—तुम जहाँ भी जाओगी… मैं वहाँ पहुँच जाऊँगा।━━━━━━━━━━━━━━━जंगल खत्म हुआ तो सामने सड़क आ गई। और वहीं दूर दिखा—रेलवे स्टेशन। शुभिका बिना सोचे-समझे दौड़ पड़ी। उसके पैर खून से लथपथ