(गाड़ी के अंदर का सन्नाटा, जो केवल बाहर गिरती भारी बारिश और आयशा की उस ठंडी, यांत्रिक (mechanical) हँसी से टूटा है। आर्यन के हाथ स्टीयरिंग व्हील पर कांप रहे हैं।)आर्यन ने गाड़ी सड़क के किनारे एक झटके के साथ रोकी। उसकी सांसें तेज़ थीं। उसने आयशा की ओर देखा, जो अब सामान्य रूप से बैठी थी, लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सी शून्यता थी।सीन 1: आयशा में पिता का साया"आयशा?" आर्यन ने फुसफुसाते हुए पूछा। "तुमने क्या कहा? फिर से बोलो।"आयशा ने अपनी गर्दन को एक अजीब सी लय में घुमाया और फिर वही आवाज़ गूँजी—विक्रम मल्होत्रा की