(न्यूज़ रूम के अंदर सन्नाटा ऐसा है जैसे कोई भारी मशीन अचानक बंद हो गई हो। बाहर सड़कों पर जनता का शोर है, जो आर्यन के समर्थन में नारे लगा रही है। विक्रम मल्होत्रा के जूतों की आवाज़ फर्श पर एक लय में गूँज रही है।)आर्यन की पकड़ उन कागज़ों पर ढीली पड़ गई। उसने उन कागज़ों की तरफ देखा, और फिर अपने पिता की उस ठंडी, मकरी जैसी मुस्कान की तरफ। विक्रम मल्होत्रा ने रिमोट का बटन दबाया, और न्यूज़ रूम की बड़ी स्क्रीन पर वही कागज़ात जलते हुए दिखाई देने लगे।सीन 1: जाल का खुलासा"आर्यन," विक्रम ने धीमी