वर्तमान समय…विक्रांत शर्मा गुस्से में पागल हो चुका था।उसकी study room पूरी तरह बिखर चुकी थी। टेबल उलटी पड़ी थी। काँच के टुकड़े पूरे floor पर फैले थे। दीवार पर लगी painting तक टूट चुकी थी। लेकिन उसका गुस्सा शांत नहीं हो रहा था।वो बोला - नामुमकिन…!उसने दहाड़ते हुए whiskey की bottle दीवार पर दे मारी।धड़ाम!!!उसके आदमी डर के मारे सिर झुकाकर खड़े थे। किसी की हिम्मत नहीं थी उसकी आँखों में देखने की। विक्रांत की साँसें भारी हो रही थीं।उसके दिमाग में बार-बार वही नाम गूँज रहा था—किशिराज।वो खुद से बड़बड़ाया -वो वापस नहीं आ सकता…मैंने उसे मरते हुए देखा